शनिवार, नवंबर 26, 2011

आतंकवादी हमलों का कारण भारत सरकार का रवैया

      आज मुंबई हमले की त्रासदी हुए तीन वर्ष हो गए हैं, इस हमले में मारे गए व्यक्तियों  को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि एवं इस हमले में घायल एवं प्रभावित हुए लोगों को सहानुभूति |
        जिस वक्त हमला हुआ था उस समय मैं नागपुर में एक होटल के कमरे में यात्रा की थकान उतार रहा था कि तभी टेलीविजन से  हमले की खबर मिली |  चूँकि उस दिन पहली बार मैंने महाराष्ट्र में प्रवेश किया था इसलिए नागपुर और मुंबई के बीच लम्बी  दूरी होने के बावजूद ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं घटना स्थल में ही मौजूद हूँ | मेरे लिए तो महाराष्ट्र में ठहराव सामान्य ही रहा पर बहुत से देशी एवं विदेशी लोगों के लिए वह ठहराव जिंदगी का ठहराव साबित हो गया | 
       पर हमले के तीन साल बीत जाने पर हमें इस दौरान हुए घटनाक्रमों के आधार पर यह सोचने कि आवश्यकता है कि इन हमलों का जिम्मेदार कौन है, आम भारतीय तथा सरकार मानती है कि इन हमलों का जिम्मेदार पाकिस्तान है जो कि अपनी भूमि पर आतंकवादियों को संरक्षण दे रहा है तथा आर्थिक एवं अन्य प्रकार की सहायता के द्वारा भारत पर आतंकवादी हमले करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है | अभी तक मेरा मानना भी यही था लेकिन वास्तविकता यह है कि इन हमलों के लिए जिम्मेदार भारत सरकार है क्योकि जब एक आतंकवादी समूह हमारी विधायिका जहाँ पर सिद्धांततः देश के नफे नुकसान से सम्बंधित बातों पर विचार करके देश के हित के लिए कानून बनाये जाते हैं अर्थात संसद पर हमला करता है और हमारे बहादुर  सुरक्षाकर्मी इस हमले को नाकाम करते हैं, हमारी जांच एजेंसियां मुख्य अपराधी को पकड़ कर अदालत में पेश करती है, हमारे न्यायालय एक नहीं बल्कि कई बार अपराधी को मृत्युदंड सुनाते हैं, परन्तु हमारी सरकार अपराधी द्वारा राष्ट्रपति को दी गयी दया याचिका को सालों तक लटकाकर मुख्य अपराधी को जेल में आराम से जीवन यापन करने कि सहूलियत प्रदान करती हैं |
      इसी प्रकार देश की आर्थिक राजधानी में आतंकवादी हमला होता है, सैकड़ों लोग मारे जाते हैं, इस आतंकी वारदात को अंजाम देने वाले नौ आतंकी भी मारे जाते है लेकिन एक बहुत ही सौभाग्यशाली आतंकवादी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जिन्दा ही पकड़ लिया जाता है, उस आतंकवादी को मीडिया के कैमरों द्वारा पूरा भारत ही नहीं पूरा विश्व आतंकी वारदात करते हुए देखता है परन्तु हमारे यहाँ न्यायालयी व्यवस्था का पूरा सम्मान किया जाता है इसीलिए हमारी सरकार अपराधी को देश के खर्चे से वकील करने कि सुविधा देती है और अब जबकि  विशेष न्यायालय और फिर उच्च न्यायालय ने चीख - चीख कर कह दिया है कि कसाब को मृत्युदंड दिया जाता है तब तक में सरकार ने अरबों रुपये कसाब की सुरक्षा और अन्य मदों में खर्च कर दिए हैं, और अब कसाब की याचिका सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है | और लम्बे समय तक सुनवाई करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय भी कसाब की फांसी की सजा बरकरार रखेगा और फिर कसाब की दया याचिका ठुमकते - ठुमकते राष्ट्रपति के पास पहुँच जाएगी और उसके बाद कसाब भी अफजल गुरु की तरह आराम से जेल में जिंदगी गुजारेगा |  
        भारत सालों से रोना रो रहा है कि पाकिस्तान आतंकवादियों को संरक्षण दे रहा है, मुंबई हमलों के मुख्य आरोपियों पर कार्यवाही नहीं कर रहा है, लेकिन जब हम  स्वयं आतंकियों को पकड़ने के बाद उनको सजा नहीं दे सकते तो हम किसी दूसरे देश वो भी पाकिस्तान से ऐसी उम्मीद कैसे कर सकते हैं कि वो आतंकवादियों को पकड़ेगा, और मैं तो चाहता हूँ की पाकिस्तान किसी आतंकवादी को पकडे तो बहुत अच्छी बात है परन्तु वह किसी भी आतंकवादी को भारत को प्रत्यर्पित न करे अन्यथा अफजल और कसाब जैसे और भी आतंकी जनता के धन से जेल में खूब मजे लूटेंगे | 
       इस स्थिति में मैं भारत में आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान, आतंकवादी संगठनों एवं उनके समर्थकों के स्थान पर स्वयं भारत को जिम्मेदार मानता हूँ, चूँकि हम लोकतांत्रिक देश के निवासी है और अप्रत्यक्ष रूप से देश की जनता ही अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से देश को चलाती है इसलिए इन हमलों के जिम्मेदार हम भारतवासी ही है यदि हम अर्थात पूरे देश की जनता आतंकियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही करने की ठान लें तो कोई भी राजनीतिक दल हमारी राय के खिलाफ नहीं जा सकता | हम विकासशील  देश होने के कारण ज्यादातर मामलों में अमेरिका एवं अन्य विकसित देशों की नीतियों को बिना कुछ सोचे समझे अपने देश में लागू करते हैं काश कि हम आतंकवाद के मामले में भी अमेरिकी नीति से कुछ सबक सीखते | जब तक हम आतंकियों के खिलाफ कड़ा रूख अख्तियार नहीं करेंगे तब तक हम आतंकी संगठनों को आतंकी वारदात करने के लिए प्रेरणास्रोत ही बने रहेंगे |

1 टिप्पणी:

  1. सामयिक और सार्थक प्रस्तुति, आभार.


    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारें.

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